नियति-कविता-डॉ. दिनेश चमोला शैलेश-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dr. Dinesh Chamola Shailesh

नियति-कविता-डॉ. दिनेश चमोला शैलेश-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dr. Dinesh Chamola Shailesh

 

नभ की
अनंत ऊंचाइयों पर
बादलों के खेत में
हरिण शावकों से फुदकते रहते हैं
बादलों के रुई के फाहों से बच्चे
बन जाते हैं वे कभी
कुलांचे भरते हिरन
तो कभी तीव्रतर गति से
उन पर झपटते हिंसक व्याघ्र

कभी-कभी
कल्पनाओं के ऐसे उर्वरा खेत,
जिनमें रहतीं हैं स्वप्नों व कर्मों की
स्वर्णिम लहलहातीं फसलें…..
पैंतालीस से पचास हजार फुट ऊंचाई से
उड़ते हुए विमान में आकाश से
कितना भयावह लगता है
एकाएक बर्फ के फाहों की
उस रोमांचक दुनिया का
देखते-देखते काल-कवलित हो जाना

हृदय के आकाश में
इसी प्रकार भावों की
उत्तुंग ऊंचाइयां फांदता मन का विमान
थाह नहीं पाता
देखता रहता है चुपचाप
अपने ही सामने सकल ग्लोब में
जीवन का असह्य
मानवी मृत्यु का महा-ताण्डव

इस महाप्रलयी विप्लव को
देखने के अलावा
नहीं कर सकता है मनुष्य कुछ भी
अपनी ही आंखों के आगे देखने को विवश है
अपनों को ही दफन होना…..
जिन्हें वह छू नहीं सकता; बतिया नहीं सकता
और न ही कर सकता कोई प्रतिरोध…..
वैश्विक मानवता पर कहर ढाता
यह नियति का कैसा निर्मम दंड है
महादानवी कोरोना !!!

 

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