निज हित के प्रयास भुलाकर-तनेंद्र सिंह राठौड़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Tanendra Singh Rathore

निज हित के प्रयास भुलाकर-तनेंद्र सिंह राठौड़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Tanendra Singh Rathore

रावतरस (श्रद्धा सुमन)
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निज हित के प्रयास भुलाकर
निज प्राणों से ऊपर उठकर
जो देश के हित सब करते हैं
वो वीर भला कब मरते हैं!

तीक्ष्ण धूप में, शीत- धार में
घोर बसंत में, सूखे पतझड़
कदम बड़े जो धरते हैं
वो वीर भला कब मरते हैं!

काल के बादल छा जाने से
ग़म का तम सब छाया है
ये मत सोचो क्या- क्या खोया
ये सोचो क्या पाया है
अभिनव भारतवंश के बेटे
सूर कभी नहीं डरते हैं
वीर भला कब मरते हैं!

भारत मां के कण- कण मिलकर
सृष्टि खुद कर जोड़- जोड़कर
मुख से मधुर सा गान करेगी
रावत पुष्प के नाम करेगी
देश के खातिर सबकुछ तज दो
दिल- मस्तक में ये समर रहे
बिपिन सिंह रावत अमर रहे
बिपिन सिंह रावत अमर रहे

 

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