ना करो -अनुभव शर्मा-Anubhav Sharma -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

 ना करो -अनुभव शर्मा-Anubhav Sharma -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

जुल्फें नहीं वो घटाएं हैं,
इन्हें फिजूल उड़ाया ना करो।

जानते हैं हम, तुम अप्सरा हो,
हर किसी को यूंही बताया ना करो।

बदनाम हो जाओगी तुम एक दिन,
दिल सबका यूं चुराया ना करो।

निगाहें, शराब हैं तुम्हारी,
मुफ्त में इसे पिलाया ना करो।

मुखड़ा तुम्हारा एक चांद है,
परदों में इसे छिपाया ना करो।

घटा के बीच की लाली है वो,
गुलाब होंठो से हटाया ना करो।

अब इजहार कर ही दो हमसे,
यूं बेवजह दिल बहलाया ना करो।

कब तक तारीखें बढ़ाते जाओगे,
इस तरह बहाना बनाया ना करो।

कहीं छोड़ ना दे, जान जिस्म को,
मीत तुम हमें यूं सताया ना करो।

Leave a Reply