नाज़िम की बात बात पे-शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

नाज़िम की बात बात पे-शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

नाज़िम की बात बात पे रुकने लगी ज़बां ।
ख़ुद को संभाल कर के वुह कहने लगा कि हां ।
ख़ाहां हो मौत कि या तुम्हें चाहिये अमां ।
बतलायो साफ़ साफ़ अब ऐ आली-ख़ानदां ।
इस दम करो कबूल अगर शाह के दीन को ।
फ़िर आसमां बना दूं तुम्हारी ज़मीन को ।

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