नायकु है एकु अरु नायका असट ताकै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

नायकु है एकु अरु नायका असट ताकै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

नायकु है एकु अरु नायका असट ताकै
एक एक नायका के पांच पांच पूत है ।
एक एक पूत ग्रेह चारि चारि नाती
एकै एकै नाती दोइ पतनी प्रसूत है ।
ताहू ते अनेक पुनि एकै एकै पांच पांच
ताते चारि चारि सुति संतति संभूत है ।
ताते आठ आठ सुता सुता सुता आठ सुत
ऐसो परवारु कैसे होइ एक सूत है ॥२२८॥

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