नाद भ्रमे जैसे मिरगाए-रागु गोंड बाणी नामदेउ जी की ੴ सतिगुर प्रसादि -शब्द (गुरू ग्रंथ साहिब) -संत नामदेव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sant Namdev Ji 

नाद भ्रमे जैसे मिरगाए-रागु गोंड बाणी नामदेउ जी की
ੴ सतिगुर प्रसादि -शब्द (गुरू ग्रंथ साहिब) -संत नामदेव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sant Namdev Ji

नाद भ्रमे जैसे मिरगाए ॥
प्रान तजे वा को धिआनु न जाए ॥1॥

ऐसे रामा ऐसे हेरउ ॥
रामु छोडि चितु अनत न फेरउ ॥1॥ रहाउ ॥

जिउ मीना हेरै पसूआरा ॥
सोना गढते हिरै सुनारा ॥2॥

जिउ बिखई हेरै पर नारी ॥
कउडा डारत हिरै जुआरी ॥3॥

जह जह देखउ तह तह रामा ॥
हरि के चरन नित धिआवै नामा ॥4॥2॥873॥

 

Leave a Reply