नहीं माँगता दाता कभी अमरता।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

नहीं माँगता दाता कभी अमरता।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

दीन -हीन की भूख मिटाना
खाली झोली में भर दाना,
तृषित कंठ की मिटे प्यास भी
नई किरण की जगे आस भी।
दूर करो नर की कुंठा, बर्बरता
नहीं माँगता दाता कभी अमरता।

दे हिम्मत जो पथ पर हारा
बेकसूर को मिले न कारा,
धरती से निर्मूल अनय हो
निष्ठुरता का पल-पल क्षय हो।
बूँद तुम्हीं हो, हहराती भी सरिता
नहीं माँगता दाता कभी अमरता।

जिन आँखों में अश्रु भरे हैं
विकल कफन की कोर धरे हैं,
धैर्य भरो तुम उनके उर में
बल, साहस निर्बल के सुर में।
जीवन में तुम ही तो दम है भरता
नहीं माँगता दाता कभी अमरता।

 

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