नहीं बनेगा-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

नहीं बनेगा-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

तय करके
नहीं लिख सकते आप
तय करके लिखेंगे
तो आप जो कुछ लिखेंगे
उसमें
लय कुछ नहीं होगा
लीन कुछ नहीं होगा
एक शब्द
दूसरे शब्द को
आवाज देता है कई बार
और अन्यमनस्क सा
दूर पर खड़ा शब्द
घूम पड़ता है आवाज की तरफ
हरफ के अपना मन है
सुन लेते हैं वे
अपने मन की आवाजें
नहीं तो दे देते हैं अनसुनी
खींचे ही कोई शब्द को
तो खिंच जायेगा बेचारा
मगर
अन्तर समझें हल
खींच जाने
और खिंच जाने का !

 

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