नशा-के.एम. रेनू-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita K. M. Renu

नशा-के.एम. रेनू-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita K. M. Renu

 

तुम कहते हो
नशा मत करो
मदिरा नशीला है
उस नशे से
एक दिन तुम्हारी
मौत हो सकती है
हम कहते हैं
नशा उस हर चीज में है
जो हर वक्त
लाखों की जान गँवाई है
और तुमने तो बस
उसकी ही कमायी
खायी है
रकम की लालच में
उसका घर तोड़ दिये
अपने स्वार्थ के खातिर
उसकी हत़्या कर दिये
कैसी साजिश
रची होगी तुमने
कि तिम उसे
बर्बाद कर दिये
और उसी का सहारा लिये
खुद आबाद हो गये
खुश है वो तब भी
और तुम शायद
उस वक्त के दायरे को
तोड़कर
आज उसी से
अपनी हार
स्वीकार कर लिये
वो मर्जी नहीं
बेबसी रही होगी
तुम्हारी

 

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