नव वर्ष के हे सृजनहार-सत्यनारायण सिंह -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Satyanarayan Singh 

नव वर्ष के हे सृजनहार-सत्यनारायण सिंह -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Satyanarayan Singh

नव वर्ष के हे सृजनहार
कीजिए मेरी कल्पना को
इतना सजग कि
मेरी कल्पना की ऊँची उड़ान
खुले आकाश की ऊँचाई नाप सके
नव वर्ष के हे नवोदित नव प्रभाकर
कीजिए मेरे मन को
इतना उजागर कि
मेरे ईद गिर्द छाया अंधेरा मुझे
भयभीत न कर सके
नव वर्ष की
हे नव चेतना
मेरे अचेतन मन को
कर दो फिर से इतना सचेतन कि
निष्क्रिय शरीर रूपी
पिंजड़े मे जो बंद है
वह खुले मुक्त विश्व में
विचर सके

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