नव्या-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal 

नव्या-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

अब शाम ढल गई
आओ नया संसार बसाते हैं
आज कुछ अँधेरे में बातें कर लें
फिर एक दिया जलाते हैं

भीगे अधरों में डूबे ये पल
न जाने कब नयी खुशियाँ लायेंगी
तब तक सिमट जाओ आलिंगन में
देखें कैसे नयी कलियाँ फूलेंगी

तुम सृष्टि में एक और सृष्टि हो
सींच रही हो एक और प्राण
तुम जैसे फिर से छोटी हो जाओ
आओ मांग ले ऐसा ही वरदान

तुम तो और भी सुन्दर लग रही हो
देखो कोई आ गई अनन्या
अब तो हम दोनों के बीच
लेटी होगी तुम्हारी जैसी ही नव्या

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