नवेदे-आज़ादी-ए-हिन्‍द -ज़फ़र अली ख़ाँ-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Zafar Ali Khan

नवेदे-आज़ादी-ए-हिन्‍द -ज़फ़र अली ख़ाँ-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Zafar Ali Khan

 

वह दिन आने को है आज़ाद जब हिन्‍दोस्‍तां होगा
मुबारकबाद उसको दे रहा सारा जहां होगा

अलम लहरा रहा होगा हमारा रायेसीना पर
और ऊंचा सब निशानों से हमारा यह निशां होगा

ज़मीं वालों के सर ख़म इसके आगे हो रहे होंगे
सलामी दे रहा झुक झुक के उसको आस्‍मां होगा

बिरहमन मंदिरों में अपनी पूजा कर रहे होंगे
मुसलमां दे रहा अपनी मसजिद में अज़ां होगा

जिन्‍हें दो वक़्त की रोटी मुयस्‍सर अब नहीं होती
बिछा उनके लिए दुनिया की हर नेमत का ख़्वां होगा

मन-ओ-तू के यह जितने ख़र्ख़शे हैं मिट चुके होंगे
नसीब उस वक़्त हिन्‍दू और मुसलमां का जवां होगा

तवाना जब ख़ुदा के फ़ज़्ल से हम नातवां होंगे
ग़ुरूर उस वक़्त अंग्रेज़ी हुकूमत का कहां होगा

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