नये सुभाषित -रामधारी सिंह ‘दिनकर’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Ramdhari Singh Dinkar Part 7

नये सुभाषित -रामधारी सिंह ‘दिनकर’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Ramdhari Singh Dinkar Part 7

समझौते की शान्ति

ज्वर में सिर पर बर्फ रखा करते हैं,
यही बहुत कुछ समझौते की शान्ति है।
किन्तु, कभी क्या ज्वर भागा है बर्फ से?
हिम को ज्वर की दवा समझना भ्रान्ति है

प्रशंसा

बुद्धिमान की करो प्रशंसा जब वह नहीं वहाँ हो,
पर, नारी की करो बड़ाई जब वह खड़ी जहाँ हो।

प्रसिद्धि

1

मरणोपरान्त जीने की है यदि चाह तुझे,
तो सुन, बतलाता हूँ मैं सीधी राह तुझे,
लिख ऐसी कोई चीज कि दुनिया डोल उठे,
या कर कुछ ऐसा काम, जमाना बोल उठे।

2

जिस ग्रन्थ में लिखते सुधी, यश खोजना अपकर्म है,
उस ग्रन्थ में ही वे सुयश निज आँक जाते हैं।

 देशभक्ति

देशभक्ति किसकी सबसे उत्तम है?
उसकी जो गाता स्वदेश की उत्तमता का गान नहीं,
किन्तु, उसे उत्तम से उत्तम रोज बनाये जाता है।

परिवार

हरि के करुणामय कर का जिस पर प्रसार है,
उसे जगत भर में निज गृह सबसे प्यारा लगता है।

 आशा

1

सारी आशाएँ न पूर्ण यदि होती हों,
तब भी अंचल छोड़ नहीं आशाओं के।

2

मर गया होता कभी का
आपदाओं की कठिनतम मार से,
यदि नहीं आशा श्रवण में
नित्य यह संदेश देती प्यार से–
“घूँट यह पी लो कि संकट जा रहा है।
आज से अच्छा दिवस कल आ रहा है”।

3.

सभी दुखों की एक महौषधि धीरज है,
सभी आपदाओं की एक तरी आशा।

आत्मविश्वास

1

गौण, अतिशय गौण है, तेरे विषय में
दूसरे क्या बोलते, क्या सोचते हैं।
मुख्य है यह बात, पर, अपने विषय में
तू स्वयं क्या सोचता, क्या जानता है।

2

उलटा समझें लोग, समझने दे तू उनको,
बहने दे यदि बहती उलटी ही बयार है,
आज न तो कल जगत तुझे पहचानेगा ही,
अपने प्रति तू आप अगर ईमानदार है।

निश्चिंत

व्योम में बाकी नहीं अब बदलियाँ हैं,
मोह अब बाकी नहीं उम्मीद में,
आह भरना भूल कर सोने लगा हूँ
बन्धु! कल से खूब गहरी नींद में।

चीनी कवि

वेणुवन की छाँह में बैठा अकेला
मैं कभी बंसी, कभी सीटी बजाता हूँ।
खूब खुश हूँ, आदमी कोई नहीं आता।
चाँद केवल रात में आ झाँकता है।
सूर्य, पर, दिन में चला जाता बिना देखे।
कौन दे उसको खबर इस कुंज में कोई छिपा है?

आत्मशिक्षण

विश्व में सबसे वही हैं वीर,
है जिन्होंने आप अपने को गढ़ा।
और वे ज्ञानी अगम गंभीर,
है जिन्होंने आप अपने से पढ़ा।

सत्य

1

शुभ्र नभ निर्मेघ, सज्जन सत्यवादी,
ईश के ये अप्रतिम वरदान हैं।

2

यदि अयोग्य है तो फिर मत वह काम करो,
यदि असत्य है तो वह बात नहीं बोलो।

3

जो असत्यभाषी हैं उनसे अपने जन भी डरते हैं,
किन्तु, सत्यवादी मानव का अरि भी आदर करते हैं।

परिचय

सबके प्रति सौजन्य और बहुतों से रक्खो राम-सलाम,
मेलजोल थोड़े लोगों से, मैत्री किसी एक जन से।

 सुख और आनन्द

1

जीवन उनके लिए मधुरता की उज्जवल रसधार है,
जिनकी आत्मा निष्कलंक है और किसी से प्यार है।

2

सुखी जीवन अधिकतर शान्त होता है।
जहाँ हलचल बढ़ी आनन्द चल देता वहाँ से।

3

सुख का रहस्य जानोगे क्या?
जीवन में हैं जो शूल उन्हें सह लेते हैं,
अनबिंधे कंटकों में जो जन रह लेते हैं,
सब उन्हें सुखी कहते, अब पहचानोगे क्या?

4.

आगे के सुख की तैयारी की एक राह,
जोगो कल के हित, अगर कभी कुछ जोग सको।
पर, आज प्राप्त है जितना भी आनन्द तुम्हें,
भोगो उसको निर्द्वन्द्व जहाँ तक भोग सको।

 

Leave a Reply