नया रिश्ता-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

नया रिश्ता-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

एक नया रिश्ता एक
पौधे की तरह होता है

एक नया रिश्ता एक पौधे की तरह होता है
जिसे भावों की उर्वर भूमि; समर्पण का बीज;
लाड का जल; प्रीत का प्रकाश दुलार का पोषण;
प्रतिदिन सामंजस्य की भांति देखरेख और
माली सी निष्ठा चाहिए जो पौधे को अपनी
संतान मान उसका पालन पोषण करता है
इन सबका सुंदर समन्वय ही पौधे को वृक्ष बनाता है
यही बातें रिश्तों पर भी लागू होती हैं
वरना रिश्ते जितनी जल्दी बनते हैं,
उपर्युक्त किसी एक कड़ी के अभाव में
उतनी तेजी से धराशायी हो जाते हैं
रिश्तों का गणित, माली सी कला पर निर्भर है..!!

 

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