नदी – जंगल बचे रहेंगे तो-प्रो. अजहर हाशमी-Prof. Azhar Hashmi | Hindi Poem | Hindi Kavita,

नदी – जंगल बचे रहेंगे तो-प्रो. अजहर हाशमी-Prof. Azhar Hashmi | Hindi Poem | Hindi Kavita,

न तो काटें, न कटने दें जंगल,
तब ही दुनिया को मिल सकेगा जल।
जंगलो का हरा – भरा रहना,
जैसे धरती पे नीर के बादल।
वन की ‘हरियाली’ से ही तो नदियां
अपनी आंखों में आंजती ‘काजल’,

बहती नदिया धरा की धड़कन है
यानी धरती का दिल सघन जंगल
नदी – जंगल बचे रहेगे तो
लाभ – शुभ – स्वास्थ्य, सर्वदा मंगल.

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