नदी किनारे गोपालदास नीरज-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

नदी किनारे गोपालदास नीरज-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

मुझको अपने जीवन में हा ! कभी न शान्ति मिलेगी

मुझको अपने जीवन में हा ! कभी न शान्ति मिलेगी ।

जब कि प्रकृति रो रो नित निशि भर,
कर न सकी भू का ठंडा उर,
फिर इन तप्त आँसुओं से क्या दिल की आग बुझेगी?
मुझको अपने जीवन में हा! कभी न शान्ति मिलेगी।

विरह ज्वलन, पीडा उमड़न को-
ही जब चिर सुख-सत्य मान कर,
भीषण क्रान्ति न अपने उर के
अरमानों की मैं पाया हर,
फिर क्या मर कर मेरे उर की यह चिर क्रान्ति मिटेगी।
मुझको अपने जीवन में हा! कभी न शान्ति मिलेगी।

कितना एकाकी मम जीवन

कितना एकाकी मम जीवन !

किसी पेड़ पर यदि कोई चिड़िया का जोड़ा बैठा होता
तो न उसे भी एक आँख भर मैं इस डर से देखा करता-
कहीं नज़र लग जाय न उनको !
कितना एकाकी मम जीवन !

 

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