नज़राने रूह-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast

नज़राने रूह-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast

तेरा बन्दा रहे दिल से यही पैमान रहा,
तायरे-फ़िक्र तेरे औज से हैरान रहा

क़द्र करना तेरी सीखें यही अरमान रहा
यही मसला, यही मज़हब यही ईमान रहा

आबरू क्या है तमन्ना-ए-वफ़ा में मरना
दीन क्या है किसी कामिल की परस्तिश करना

मुझ से याराने अदम ने ये अगर फ़रमाया
हसरत आबाद जहाँ से तुझे क्या हाथ आया

मैं कहूँगा कि बस एक रहबरे कामिल पाया
ज़िन्दगी की यही दौलत है यही सरमाया

लेके दुनिया से यही महरे वफ़ा आया हूँ
अपने मोहसिन की ग़ुलामी की सनद लाया हूँ।

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