धीमे धीमे गाऊं-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

धीमे धीमे गाऊं-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

धीमे-धीमे गाऊं, धीरे-धीरे गाऊं
होले-होले गाऊं, तेरे लिये पिया
गुन-गुन मैं गाती जाऊं
छुन-छुन पायल छनकाऊं
सुन-सुन कब से दोहराऊं
पिया पिया पिया

गुलशन महके-महके, ये मन बहके-बहके
और तन दहके-दहके, क्यों है बता पिया
मन की जो हालत है ये, तन की जो रंगत है ये
तेरी मोहब्बत है ये, पिया पिया पिया

ज़िन्दगी में तू आया तो, धूप में मिला साया तो
जागे नसीब मेरे
अनहोनी को था होना, धूल बन गई है सोना
आ के करीब तेरे
प्यार से मुझको तूने छुआ है
रूप सुनहरा तब से हुआ है
कहूं और क्या, तुझे मैं पिया, ओ
तेरी निगाहों में हूं, तेरी ही बाहों में हूं
ख्वाबों की राहों में हूं, पिया पिया पिया
गुन-गुन मैं गाती…

पिया पिया…
मैंने जो खुशी पाई है, झूम के जो रुत आई है
बदले ना रुत वो कभी
दिल को देवता जो लगे, सर झुका है जिसके आगे
टूटे ना बुत वो कभी
कितनी है मीठी, कितनी सुहानी
तूने सुनाई है जो कहानी
मैं जो खो गई, नई हो गई, ओ
आंखों में तारे चमके, रातों में जुगनू दमके
मिट गये निशान गम के, पिया पिया पिया
गुन-गुन मैं गाती…

(ज़ुबैदा)

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