धरी निशानी कौस दी मके अन्दर पूज कराई ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

धरी निशानी कौस दी मके अन्दर पूज कराई ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

धरी निशानी कौस दी मके अन्दर पूज कराई ॥
जिथे जाई जगत विच बाबे बाझ न खाली जाई ॥
घर घर बाबा पूजीए हिन्दू मुसलमान गुआई ॥
छपे नांह छपायआ चड़्या सूरज जग रुशनाई ॥
बुक्या सिंघ उजाड़ विच सब मिरगावल भन्नी जाई ॥
चड़्हआ चन्द न लुकई कढ कुनाली जोत छपाई ॥
उगवणहु ते आथवणहु नउ खंड प्रिथवी सभ झुकाई ॥
जग अन्दर कुदरत वरताई ॥34॥

Leave a Reply