धरती उठाती है-बुनी हुई रस्सी-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra 

धरती उठाती है-बुनी हुई रस्सी-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

धरती उठाती है मुझे ऊपर
आकाश
ताकता है नीचे भू पर ऐसे
जैसे अंक में लेना चाहता है
निश्शंक

मगर उसकी आँखों में
हिचक है थोड़ी-सी

यों कि धरती उछाल तो रही है मुझे ऊपर
मगर फिर से अंक में लेने के लिए मुझे

आकाश की गोद में
देने के लिए नहीं!

 

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