धनु जोबनु अरु फुलड़ा नाठीअड़े दिन चारि-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

धनु जोबनु अरु फुलड़ा नाठीअड़े दिन चारि-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

धनु जोबनु अरु फुलड़ा नाठीअड़े दिन चारि ॥
पबणि केरे पत जिउ ढलि ढुलि जुमणहार ॥१॥
रंगु माणि लै पिआरिआ जा जोबनु नउ हुला ॥
दिन थोड़ड़े थके भइआ पुराणा चोला ॥१॥ रहाउ ॥
सजण मेरे रंगुले जाइ सुते जीराणि ॥
हं भी वंञा डुमणी रोवा झीणी बाणि ॥२॥
की न सुणेही गोरीए आपण कंनी सोइ ॥
लगी आवहि साहुरै नित न पेईआ होइ ॥३॥
नानक सुती पेईऐ जाणु विरती संनि ॥
गुणा गवाई गंठड़ी अवगण चली बंनि ॥४॥२४॥(23)॥

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