धड़कन धड़कन- कितनी नावों में कितनी बार -सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

धड़कन धड़कन- कितनी नावों में कितनी बार -सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

धड़कन धड़कन धड़कन—
दाईं, बाईं, कौन सी आँख की फड़कन—
मीठी कड़वी तीखी सीठी
कसक-किरकिरी किन यादों की रड़कन?
उँह! कुछ नहीं, नशे के झोंके-से में
स्मृति के शीशे की तड़कन!

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