दो शब्द- कोयला और कवित्व -रामधारी सिंह ‘दिनकर’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Ramdhari Singh Dinkar 

दो शब्द- कोयला और कवित्व -रामधारी सिंह ‘दिनकर’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Ramdhari Singh Dinkar

ये कविताएँ पिछले पाँच–छह वर्षों के भीतर रची गई थीं। ज्यादातर सन् ’60 से इधर की ही होंगी। पुस्तक का नाम एक खास कविता के नाम पर है जो पुस्तक के अन्त में आती है। कुछ कविताएँ ऐसी हैं जो पुरानी और नई कविताओं के बीच की कड़ियों–सी दिखाई देंगी। मुझे सबसे अधिक यही कविताएँ आनन्द देती हैं। आशा है, पाठक भी उनसे आनन्द प्राप्त करेंगे।

—दिनकर
पटना
वसन्त पंचमी
19–1–64

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