दो रुबाइयाँ-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

दो रुबाइयाँ-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

#1.
एक चीज़ है जो अभी खोके अभी खोनी है,
एक बात है जो अभी होके अभी होनी है,
ज़िन्दगी नींद है जो जागकर आने वाली
जो अभी सोके अभी सोई अभी सोनी है!

#2.
रात इधर ढलती तो दिन उधर निकलता है,
कोई यहाँ रुकता तो कोई यहाँ चलता है;
दीप औ’ पतंगे में फ़र्क सिर्फ़ इतना है
एक जल के बुझता है, एक बुझ के जलता है !

Leave a Reply