दोहे- योगेश छिब्बर ‘आनन्द’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yogesh Chhibber Anand 

दोहे- योगेश छिब्बर ‘आनन्द’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yogesh Chhibber Anand 

 

बैठी आंगन प्रेम के, लेकर मन का सूप
थोथा जगत् उड़ा दिया, बचा पिया का रूप

पिया तुम्हारा रूप है, कैसा साहूकार
नैना गिरवी रख लिये, दरस दिया इक बार

एक पहर ठहरी सखी, कान्हा जी के ठौर
पहुँची कोई और थी, लौटी कोई और

इक गोपी लड़ती फिरे, माखन लिया चुराय
दूजी बैठी रो रही, छिना न माखन, हाय

मटकी फूटे से मिले, मुझको जो सुख श्याम
उस सुख से मैं पा गई, सौ मटकी का दाम

एक पहर ठहरी सखी कान्हाजी के ठौर
आयी कोई और थी, लौटी कोई और

 

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