दोहे-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi part 1

दोहे-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi part 1

कूक करूँ तो जग हँसे, चुपके लागै घाव।
ऐसे कठिन सनेह का किस विधि करूं उपाव॥

जो मैं ऐसा जानती पीत किए दुख होय।
नगर ढिंढोरा फेरती पीत न कीजो कोय॥

आह! दई कैसी भई अन चाहत के संग।
दीपक को भावै नहीं जल जल मरे पतंग॥

विरह आग तन में लगी जरन लगे सब गात।
नारी छूवत वैद के पड़े फफोले हात॥

हिरदे अंदर दव लगी धुवां न परगट होय।
जातन लागे सो लखे या जिन लाई होय॥

ना मेरे पंख न पाँव बल मैं अपंख पिया दूर।
उड़ न सकूँ गिरि गिरि पडूँ रहूँ बिसूर बिसूर॥

दिल चाहे दिलदार को तन चाहे आराम।
दुविधा में दोहू गए माया मिली न राम॥

देह सुमन तें ऊजरी मुख तें चंद लजाय।
भौहें धनकें तान के पलकें बान चलाय॥

भेंट भई जाते कही नैनन अंसुवा लाय।
हो कोई ऐसा महंत जो पीतम मंदिर बताय॥

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