दोहे-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi part 2

दोहे-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi part 2

अलकन फंदे उड़ परी मन फस दियौ रोय।
दृगन जादू डार के सुध बुध दीनी खोय॥

नेह गले का हार है हूं तीरे बलिहार।
मारे मोहे विरह दुख ले चल वाके द्वार॥

पलक कटारी मारके हिरदे रक्त बहाय।
कह की आह सामर्थ जो वाके द्वारे जाय॥

नेह नगर की रीत है तन मन देहौ खोय।
पीति डगर जब पग रखा होनी हो सो होय॥

पीतम ने मुँह मोड़ के कीनो मान गुमान।
बिन देखे वा रूप के मेरे कढ़त पिरान॥

मन मोरा बस कर लियो, काहे कीनो ओट।
ऐसी मो ते मन हरन का बन आई खोट॥

मन मेरो या बात रस निपट भयौ परसंद।
निकसो दुख मन बीचते आन भरो आनन्द॥

 

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