दैया री मोहे भिजोया री- अमीर खुसरो -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Amir Khusro ,

दैया री मोहे भिजोया री- अमीर खुसरो -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Amir Khusro ,

दैया री मोहे भिजोया री
शाह निजाम के रंग में।
कपरे रंगने से कुछ न होवत है
या रंग में मैंने तन को डुबोया री
पिया रंग मैंने तन को डुबोया
जाहि के रंग से शोख रंग सनगी
खूब ही मल मल के धोया री।
पीर निजाम के रंग में भिजोया री।

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