देहरी पर धरा दीप-यों गाया है हमने तुमको -कुमार विश्वास-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Vishwas 

देहरी पर धरा दीप-यों गाया है हमने तुमको -कुमार विश्वास-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Vishwas

देहरी पर धरा दीप कहता है अब
एक आहट को घर साथ ले आइये
मन-शिवाले में में जो गूँजती ही रहे
गुनगुनाहट को घर साथ ले आइये

कोई हो जो बुहारे मेरा द्वार भी
कोई आंगन की तुलसी को पानी तो दे
शर्ट के टांक कर सारे टूटे बटन
सांस को मेहन्दियों की निशानी तो दे
बस-यही, बस-यही, बस-यही, बस-यही
इस ‘त्रिया-हठ’ को घर साथ ले आइये

कोई रोके मुझे, कोई टोके मुझे
ताकि रातों में खुद को मिटा ना सकूं
कोई हो जिसकी आंखों के आगे कभी
कुछ कहीं भी, किसी से छुपा ना सकूं
श्रान्ति दे कलांति को जो नयन-नीर से
उस नदी-तट को घर ले आइये।

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