देहरी पर दिया- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

देहरी पर दिया- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

देहरी पर दिया
बाँट गया प्रकाश
कुछ भीतर, कुछ बाहर:
बँट गया हिया-
कुछ गेही, कुछ यायावर।
हवा का हलका झोंका
कुछ सिमट, कुछ बिखर गया
लौ काँप कर फिर थिर हुई:
मैं सिहर गया।

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