देश हमारा लूट लियो- अंतर्द्वंद्व एखलाक ग़ाज़ीपुरी-एखलाक ग़ाज़ीपुरी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Akhlaque Gazipuri

देश हमारा लूट लियो- अंतर्द्वंद्व एखलाक ग़ाज़ीपुरी-एखलाक ग़ाज़ीपुरी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Akhlaque Gazipuri

थोड़ा सा छल थोड़ी नफरत थोड़ी सी मक्कारी लो
ठग विद्या का ज्ञान लो थोड़ा थोड़ी सी अय्यारी लो
झूठे वादों का गट्ठर लो जनता को मूर्ख बनाने को
थोड़ी सी चतुराई लो फिर उसमें अवगुण भारी लो
एक साथ सब खल में डालो ठीक सबको कूट लियो
अब सारा मिश्रण भेजे में रख देश हमारा लूट लियो

बेशर्मी की सारी किस्में खोज खाजकर ले आना
भ्रष्टाचार की गठरी संग तुम घूस माँगकर ले आना
जनता से लो खून पसीना गाय भैंस से चारा लो
बेईमानी का काला मोती खूब छानकर ले आना
इन सब का एक घोल बनाकर छोटा छोटा घूंट पियो
नशा चढ़ाकर ताकत का तुम देश हमारा लूट लियो

नेता बनने की ख़ातिर तुम बस इतना सा कष्ट करो
कालाधन को गले लगाकर रंगभेद को नष्ट करो
जाति धर्म का जहर लो थोड़ा थोड़ी सी गद्दारी लो
पोत के अपने मुँह पर कालिख तुम खादी को भ्रष्ट करो
जो विरोध में कुछ भी बोले उनको जमकर कूट लियो
झार के खद्दर अपने तन पर देश हमारा लूट लियो

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