देख, पथ पर काल आता।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

देख, पथ पर काल आता।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

हैं अनेकों रंग इसके
रूप अगणित, अंग इसके,
जलप्रलय, जलमग्न कर थल भी धधकता ज्वाल लाता।
देख, पथ पर काल आता।

है नहीं विश्वास इसका
है न कोई खास इसका,
बन कभी झंझा- झकोरे, ले कभी भूचाल आता।
देख, पथ पर काल आता।

है न करुणा- धार इसमें
जिन्दगी है क्षार इसमें,
प्राण हरने के लिए यह रूप धर विकराल आता।
देख, पथ पर काल आता।

मरघटों की ले उदासी
है रुधिर की मौत प्यासी,
ले कभी कर में कटारें, कभी घूँघट डाल आता।
देख, पथ पर काल आता।

 

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