देख तेरे बिन शहर में क्या क्या चल रहा है-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

देख तेरे बिन शहर में क्या क्या चल रहा है-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

देख तेरे बिन शहर मे, ये क्या क्या चल रहा है
सांसे थम गयी हैं और एक कारवां चल रहा है

बेबादल है आसमां, तो फिर क्या बरस रहा है
रो रहा है कोई या बेवक़्त मौसम बदल रहा है

क्यों एक परिंदा बेपंख उड़ने को मचल रहा है
लगता है दरख़्त सुखकर बारिश में जल रहा है

टूटे आइनों में एक चेहरा अब भी संवर रहा है
ख्वाब थामे काजल इन पलकों पर पल रहा है

मकां ढह गया है मेरा, एक नया घर बन रहा है
देख तेरे बिन शहर में, ये क्या क्या चल रहा है ।

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