देखा, पास पहुँचकर देखा-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

देखा, पास पहुँचकर देखा-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

देखा,
पास पहुँचकर देखा
‘हेमहार’ तरु अमलतास को।

मुझको आए याद ‘निराला’!

काव्य-कृती को
मैंने झुककर
नमन किया,
फिर से उनके साथ जिया।

पत्र-पुष्प के
उनके अक्षर
गीत सुने,
गुन-कौरव के
गुरुतर अर्थ गुने।

अतिशय हर्ष-हिलोर हुआ,
भास्वर भाव-
विभोर हुआ!

रचनाकाल: २३-०३-१९९१

 

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