देखा जूंही हुज़ूर ने -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

देखा जूंही हुज़ूर ने -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

देखा जूंही हुज़ूर ने दुश्मन सिमट गए ।
बढ़ने की जगह ख़ौफ़ से नामरद हट गए ।
घोड़े को एड़ दे के गुरू रन में डट गए ।
फ़रमाए बुज़दिलों से कि तुम क्यों पलट गए ।
अब आओ रन में जंग के अरमां निकाल लो ।
तुम कर चुके हो, वार हमारा संभाल लो ।

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