दूर मत करना चरण से-लहर पुकारे -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

दूर मत करना चरण से-लहर पुकारे -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

दूर मत करना चरण से!

छोड़ कर संसार सारा,
है लिया इनका सहारा,
यदि न ठौर मिला यहाँ भी क्या मिला फिर मनुज-तन से?
दूर मत करना चरण से !

कलुष जीवन-पुष्य होगा,
स्वप्न, सत अक्षुण्ण होगा,
छू सकूँ प्रिय पद तुम्हारे प्यार के गीले नयन से!
दूर मत करना चरण से!

यदि तुम्हारी छाँह-चितवन-
में पले यह छुद्र जीवन,
है अटल विश्वास जीवन छीन लाऊँगा मरण से!
दूर मत करना चरण से!

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