दुख हरता हरि नामु पछानो- शब्द-रागु बिलावलु महला ९ ੴ सतिगुर प्रसादि -गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

दुख हरता हरि नामु पछानो- शब्द-रागु बिलावलु महला ९
ੴ सतिगुर प्रसादि -गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

दुख हरता हरि नामु पछानो ॥
अजामलु गनिका जिह सिमरत मुकत भए जीअ जानो ॥1॥रहाउ॥
गज की त्रास मिटी छिन हू महि जब ही रामु बखानो ॥
नारद कहत सुनत ध्रअ बारिक भजन माहि लपटानो ॥1॥
अचल अमर निरभै पदु पाइओ जगत जाहि हैरानो ॥
नानक कहत भगत रछक हरि निकटि ताहि तुम मानो ॥2॥1॥830॥

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