दुआ-सरे-वादी-ए-सीना -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz 

दुआ-सरे-वादी-ए-सीना -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

आईए, हाथ उठायें हम भी
हम जिन्हें रसमे-दुआ याद नहीं

हम जिन्हें सोज़े-मोहब्बत के सिवा
कोई बुत कोई ख़ुदा याद नहीं

आईए, अरज़ गुज़ारें कि निगारे-हसती
ज़हरे-इमरोज़ में शीरीनी-ए-फ़रदो भर दे

वोह जिन्हें ताबे-गरांबारी-ए-अय्याम नहीं
उनकी पलकों पे शबो-रोज़ को हलका कर दे

जिनकी आंखों को रुख़े-सुबह का यारा भी नहीं
उनकी रातों में शमय मुनव्वर कर दे

जिनके कदमों को किसी रह का सहारा भी नहीं
उनकी नज़रों पे कोई राह उजागर कर दे

जिनका दीं पैरवीए-कज़बो-रिया है उनको
हिम्मते-कुफ़र मिले, जुरअते-तहकीक मिले

जिनके सर मुंतज़िरे-तेग़े-जफ़ा हैं उनको
दस्ते-कातिल को झटक देने की तौफ़ीक मिले

इशक का सररे-नेहां जान-तपां है जिससे
आज इकरार करें और तपिश मिट जाये

हरफ़े-हक दिल में खटकता है जो कांटे की तरह
आज इज़हार करें और ख़लिश मिट जाये

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