दीप-मालिका-दीप्ति  दीपावली पंचपद -पवित्र पर्व -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

दीप-मालिका-दीप्ति  दीपावली पंचपद -पवित्र पर्व -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

वसुधा हँसी, लसी दिवि दारा,
विलसित शरद सुधा-निधि द्वारा।

हुआ विभासित नील गगनतल,
उच्च हिमालय मंजुल अंचल,
काश-प्रसून-समूह समुज्ज्वल,
कमला-कलित सकल पंकज-दल,
चढ़ा पादपावलि पर पारा।

अमल-धवल आभाओं से लस,
बहा दिशाओं में अनुपम रस,
विभा गयी तृण बीरुध में बस,
हुआ उमंगित मानव-मानस,
चमका जगत-विलोचन-तारा।

मिले विमलता परम मनोरम,
बने नगर, पुर, ग्राम दिव्यतम,
सुधा-धवल मंदिर सुर-सुर सम,
स्वच्छ सलिल सर-सरित समुत्ताम,
हुआ रजत-निभ रज-कण सारा।

बना काल को कलित कांतिधर,
अमा-निशा को आलोकित कर,
पावस-जनित कालिमाएँ हर,
दमक-दीप-मालाओं में भर,
घर-घर बही ज्योति की धारा।

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