दीप्त सीमन्त-मैं मिलिट्री का बूढ़ा घोड़ा -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun 

दीप्त सीमन्त-मैं मिलिट्री का बूढ़ा घोड़ा -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

अब तो कुछ पता नहीं
तुम्हारी उस दीप्त माँग का
कैसे करूँ उस जगह का सन्धान
जहाँ पहले-पहल
लगाया था सिन्दूर
तुम्हारा वह कुंतलित भाल
अब तो हो रहा मात्र
पुरातत्त्व-स्मृति

जबकि इस चेतना पटल पर
अब भी है झिलमिल
तुम्हारी वह सद्य-सन्दूरित माँग
जबकि अब रेख वह नहीं मिलती
उस एक किशोरी की उस दीप्त माँग की !

Leave a Reply