दीपक पतंग संग प्रीति इकअंगी होइ-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

दीपक पतंग संग प्रीति इकअंगी होइ-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

 

दीपक पतंग संग प्रीति इकअंगी होइ
चन्द्रमा चकोर घन चात्रिक नु होत है ।
चकयी अउ सूर जलि मीन ज्यु कमल अलि
कासट अगन मृग नाद को उदोत है ।
पित सुत हित अरु भामनी भतार गति
मायआ अउ संसार दुआर मिटत न छोति है ।
गुरसिख संगति मिलाप को प्रताप साचो
लोक परलोक सुखदायी ओतिपोति है ॥१८७॥

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