दिल में हम एक ही जज्बे को समोएँ कैसे-ग़ज़लें -अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

दिल में हम एक ही जज्बे को समोएँ कैसे-ग़ज़लें -अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

दिल में हम एक ही जज्बे को समोएँ कैसे
अब तुझे पा के यह उलझन है के खोये कैसे

ज़हन छलनी जो किया है, तो यह मजबूरी है
जितने कांटे हैं, वोह तलवों में पिरोयें कैसे

हम ने माना के बहुत देर है हश्र आने तक,
चार जानिब तेरी आहट हो तो सोयें कैसे

कितनी हसरत थी, तुझे पास बिठा कर रोते
अब यह-यह मुश्किल है, तेरे सामने रोयें कैसे

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