दिल के कोरे कागज पर एक गीत-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

दिल के कोरे कागज पर एक गीत-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

दिल के कोरे कागज पर एक
नया सा कोई गीत लिखूं ।
लिख दूं तुमको अपनी मोहब्बत
या फिर अपना मीत लिखूं ।।

लिखा है तुमको हर गीतों में
ग़ज़ल ग़ज़ल में गाया है ।
हर आखर लिपट कर तुमसे
फिर कागज़ पर आया है ।
तुमको पूरा इश्क़ लिखूं या
इश्क़ की कोई रीत लिखूं ।
लिख दूं तुमको अपनी मोहब्बत
या फिर अपना मीत लिखूं ।।

मन के कोरे कागज पर एक
नया सा कोई गीत लिखूं ।
लिख दूं तुमको अपनी मोहब्बत
या फिर अपना मीत लिखूं ।।

बादल, बारिश, झील, चंद्रमा
सबसे तेरा श्रृंगार लिखूं ।
सांस के पृष्ठों पर सजाकर
तुमको जीवन सार लिखूं ।
पल पल हारा तुमसे ये मन
फिर भी तुमको जीत लिखूं ।
लिख दूं तुमको अपनी मोहब्बत
या फिर अपना मीत लिखूं ।।

मन के कोरे कागज पर एक
नया सा कोई गीत लिखूं ।
लिख दूं तुमको अपनी मोहब्बत
या फिर अपना मीत लिखूं ।।
मन के बृज की राधा तुमको
खुद को तेरा श्याम लिखूं ।
जन्म जन्म की डोर से बंधकर
हर जन्म मैं तेरे नाम लिखूं ।
लिखूं तुम्हे मेरा पागलपन या
इस पागल मन की प्रीत लिखूं ।
लिख दूं तुमको अपनी मोहब्बत
या फिर अपना मीत लिखूं ।।

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