दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते-गुमाँ-ग़ज़लें-जौन एलिया -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaun Elia

दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते-गुमाँ-ग़ज़लें-जौन एलिया -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaun Elia

दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
अब कोई शिकवा हम नहीं करते

जान-ए-जाँ तुझ को अब तिरी ख़ातिर
याद हम कोई दम नहीं करते

दूसरी हार की हवस है सो हम
सर-ए-तस्लीम ख़म नहीं करते

वो भी पढ़ता नहीं है अब दिल से
हम भी नाले को नम नहीं करते

जुर्म में हम कमी करें भी तो क्यूँ
तुम सज़ा भी तो कम नहीं करते

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