दिया-कविता-पूर्णिमा वर्मन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Purnima Varman

दिया-कविता-पूर्णिमा वर्मन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Purnima Varman

दिया दिया दिया
मुठ्ठी भर माटी,
चुटकी भर स्नेह
जगमग जग किया।

दिया और बाती
स्नेह रंग राँची
औ’ मन उजास पाती
गई रात बाँची।

चौक-चौक चंदन
स्वस्तिक और दिया,
कलाई में कलावा
हर्ष-हर्ष हिया।

सोने के कंगन
माटी का दिया,
द्वारे पर तोरण
चौबारे पिया।

खील और बताशे
घर घर में बाँटे,
हर मन दीवाली
हर मुंडेर दिया।

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