दिनसु चड़ै फिरि आथवै-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

दिनसु चड़ै फिरि आथवै-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

दिनसु चड़ै फिरि आथवै रैणि सबाई जाइ ॥
आव घटै नरु ना बुझै निति मूसा लाजु टुकाइ ॥
गुड़ु मिठा माइआ पसरिआ मनमुखु लगि माखी पचै पचाइ ॥१॥
भाई रे मै मीतु सखा प्रभु सोइ ॥
पुतु कलतु मोहु बिखु है अंति बेली कोइ न होइ ॥१॥ रहाउ ॥
गुरमति हरि लिव उबरे अलिपतु रहे सरणाइ ॥
ओनी चलणु सदा निहालिआ हरि खरचु लीआ पति पाइ ॥
गुरमुखि दरगह मंनीअहि हरि आपि लए गलि लाइ ॥२॥
गुरमुखा नो पंथु परगटा दरि ठाक न कोई पाइ ॥
हरि नामु सलाहनि नामु मनि नामि रहनि लिव लाइ ॥
अनहद धुनी दरि वजदे दरि सचै सोभा पाइ ॥३॥
जिनी गुरमुखि नामु सलाहिआ तिना सभ को कहै साबासि ॥
तिन की संगति देहि प्रभ मै जाचिक की अरदासि ॥
नानक भाग वडे तिना गुरमुखा जिन अंतरि नामु परगासि ॥੪॥੩੩॥੩੧॥੬॥੭੦॥੪੧॥

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