दादी से बोले अपने -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

दादी से बोले अपने -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

दादी से बोले अपने सिपाही किधर गए ।
दरिया पि हम को छोड़ के राही किधर गए ।
तड़पा के हाय सूरत-ए-माही किधर गए ।
अब्बा भगा के लशकर-ए-शाही किधर गए ।
भाई भी हम को भूल गए शौक-ए-जंग में ।
अपना ख़याल तक नहीं ज़ौक-ए-तुफ़ंग में ।

This Post Has One Comment

Leave a Reply