दहेज लूटता रहा।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

दहेज लूटता रहा।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

दहेज बेलगाम है
प्रथा स्वच्छंद आम है,
समाज को डूबो रहा
कलुष असीम बो रहा।
कुटुम्ब छूटता रहा
दहेज लूटता रहा।

मांग बेशुमार है
मुद्रिका व हार है,
गरीब बाप झुक गया
कदम बढ़ाके रुक गया।
स्वप्न टूटता रहा
दहेज लूटता रहा।

माँ बहुत उदास है
जीवन्त एक लाश है,
वेदना रची ह्रदय
श्वास की जो रुद्ध लय।
भ्रातृ हूकता रहा
दहेज लूटता रहा।

लाडली कई जली
त्यागकर धरा चली,
गली- डगर उदास है
अनबुझी ये प्यास है।
ममत्व सूखता रहा
दहेज लूटता रहा।

 

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