दश्ते-ख़िज़ाँ में-कविता -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

दश्ते-ख़िज़ाँ में-कविता -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

दश्ते-ख़िज़ाँ में जिस दम फैले
रुख़्सते-फ़स्ले-गुल की ख़ुशबू
सुभ के चश्मे पर जब पहुँचे
प्यास का मारा रात का आहू
यादों के ख़ाशाक में जागे
शौक़ के अंगारों का जादू
शायद पल-भर को लौट आए
उम्रे-गुज़िश्ता, वस्ले-मनो-तू

बेरूत, मई, १९८२

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