दर्पण में हिय के वह मूरति आय बसी-गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gayaprasad Shukla Sanehi

दर्पण में हिय के वह मूरति आय बसी-गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gayaprasad Shukla Sanehi

दर्पण में हिय के वह मूरति आय बसी न चली तदबीरैं ।
सो हवै दु टूक सनेही गयो पै परी विरहागिनि ताप की भीरैं ।।
दौन में प्रतिबिम्बित है छवि दूनी लगे उपजावन पीरैं ।
सालति एकै रही जिय में अब एक तै ह्वै गई द्वै तस्वीरें ।।

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